UKPSC has invited applications for the following 25 Vacancies of Veterinary Officer (Group B) in Animal Husbandry Department by direct recruitment. Eligible male and female candidates can apply online for the Pashu Chikitsa Adhikari (VO) Vacancies through the website psc.uk.gov.in from 25 August to 14 September 2026. UKPSC Veterinary Officer Recruitment and Exam Syllabus 2026-2027 like vacancy details, salary, eligibility, application form, selection process etc are given below.
Uttarakhand Pashu Chikitsa Adhikari Recruitment 2026
Post Name and Nature – पशुचिकित्सा अधिकारी, पशुपालन विभाग (समूह ‘ख‘, राजपत्रित/ अस्थाई/ अंशदायी पेंशनयुक्त)।
Pay Scale – Rs 56100-177500 Pay Level-10 (Old scale Rs 15600-39100 with GP Rs 5400).
Total Number of Vacancies – 25 Posts (Group B)
1. General – 20 Vacancies (UR-13, SC-02, OBC-03, EWS-02)
2. Backlog – 05 Vacancies (SC-01, Divyang-04)
See also: Uttarakhand Samuh G Recruitment Group C Vacancies
Age Limit – 21 to 42 years as on 01.07.2026 i.e. candidate must be born between 02.07.1984 and 01.07.2005. Relaxation in upper age limit for SC, ST, OBC, Ex-Servicemen and other categories is applicable as per Govt rules.
Educational Qualification – Bachelor’s degree in Veterinary Science and Animal Husbandry (B.V.Sc and A.H) from a university established by law in India and recognized by the Indian Veterinary Council or its equivalent degree from any other institution recognized by the Government. The candidate must be duly registered with Uttarakhand Veterinary Council.
Preferential Qualification – Other things being equal, preference will be given to a candidate who possesses a post graduate degree, diploma or any other higher qualification in Veterinary Science OR who has served in the Territorial Army for a minimum period of 02 years OR who has obtained B or C certificate of National Cadet Corps.
See also: AHD Veterinary Pharmacy Officer Recruitment in Uttarakhand
Veterinary Officer Selection Process and Pattern
The selection process consists of objective type written exam of maximum 800 Marks as per the exam pattern and syllabus given below. The written exam comprises of Paper-1 (General Studies and General Hindi), Paper-2 (Veterinary Science) and Paper-3 (Animal Science). Each paper includes objective type multiple choice questions (02 marks each).
- Paper-1 (General Studies and General Hindi): 100 Questions of maximum 200 Marks (02 Hours duration).
- Paper-2 (Veterinary Science): 150 Questions of maximum 300 Marks (03 Hours duration).
- Paper-3 (Animal Science): 150 Questions of maximum 300 Marks (03 Hours duration).
The detailed and latest UKPSC Veterinary Officer Syllabus for the objective type written exam as provided by the commission is given below.
There will be negative marking of 0.5 marks (one fourth of the marks assigned to question) for every wrong answer given by candidates. The written examination will be conducted as per the UKPSC Exam Calendar at the exam centers of Haridwar and Haldwani. Final selection will be made on the basis of performance in written exam subject to document verification.
Minimum Qualifying Marks:
UR category and subcategory – 45%
OBC category and subcategory – 40%
EWS and sub-categories – 40%
SC/ST category and subcategory – 35%
See also: उत्तराखंड सहायक कृषि अधिकारी भर्ती and Exam Syllabus
Online Form, Important Dates and Notification
Eligible and interested candidates are required to submit online application for the Uttarakhand Veterinary Officer Recruitment through the website psc.uk.gov.in from 25th Aug to 14th Sep 2026. Before applying online, keep ready your mobile number, email id, educational details and scanned images of recent colour passport size photograph and signature in JPG/ JPEG format only. After successful submission of online application, take a printout of computer generated form for record and future correspondence.
Application fee:
UR/EWS/OBC Category – Rs 150/- plus processing charges.
SC/ST Category – Rs 60/- plus processing charges.
PwD Category – Processing charges (no application fee).
Orphan Category – Nil.
Important Dates:
Starting date for submission of online application – 25th Aug 2026
Last date for submission of online application – 14th Sep 2026 (11:59 PM)
Last date for payment of exam fee – 14th Sep 2026 (11:59 PM)
Correction in online application – 22nd Sep to 01st Oct 2026 (11:59 PM)
Admit Card download – 01/02 weeks before the exam date
Exam date – See UKPSC Exam Calendar
Register and submit the online application form by visiting at the direct link provided below. For more details about the UKPSC Veterinary Officer Selection Exam 2026, you can download the Official Notification (Advertisement A-2/ DR (VO)/ S-1/ 2026) in PDF format.
See also: UKPSC समीक्षा अधिकारी भर्ती and RO ARO Exam Syllabus
UKPSC Veterinary Officer Syllabus (Detailed)
The detailed syllabus of Uttarakhand Pashu Chikitsa Adhikari (VO) Exam 2026-2027 is as follows:
Paper I (General Studies and General Hindi)
प्रश्नों की संख्याः 100, अधिकतम अंकः 200 एवं समयावधिः 2 घण्टे।
General Studies (80 प्रश्न / 160 अंक)
सामान्य विज्ञान एवं कंप्यूटर से संबंधित जानकारी : सामान्य विज्ञान एवं कंप्यूटर संचालन की आधारभूत जानकारी में प्रश्न विज्ञान एवं कंप्यूटर की सामान्य समझ एवं दैनिक जीवन में इनके अनुप्रयोग पर आधारित होंगे।
भारत का इतिहास तथा भारतीय राष्ट्रीय आन्दोलन : भारत का इतिहास तथा भारतीय राष्ट्रीय आन्दोलन के अन्तर्गत प्रश्न; प्राचीन, मध्यकालीन एवं आधुनिक भारतीय इतिहास की सामान्य जानकारी तथा भारत के स्वतंत्रता आन्दोलन पर आधारित होंगे।
भारतीय राज्य व्यवस्था : भारतीय राज्य व्यवस्था के अन्तर्गत प्रश्न; भारतीय राज्यव्यवस्था, संविधान एवं पंचायती राज पर आधारित होंगे।
भारत का भूगोल एवं जनांकिकी : इसके अन्तर्गत प्रश्न भारत के भौगोलिक, पारस्थितिकीय, सामाजिक-आर्थिक और जनांकिकीय पक्षों की सामान्य समझ पर आधारित होंगे।
सम-सामयिक घटनाएं : इसके अन्तर्गत प्रश्न उत्तराखण्ड राज्यीय तथा राष्ट्रीय महत्व की समसामयिक घटनाओं पर आधारित होंगे।
उत्तराखण्ड का इतिहास : उत्तराखण्ड की ऐतिहासिक पृष्ठभूनि: प्राचीनकाल (आरम्भ से 1200 ई0 तक): मध्यकाल (1200 से 1815 ई0 तक): प्रभावशाली राजवंश एवं उनकी उपलब्धियाँ, गोरखा आक्रमण एवं शासन, ब्रिटिश शासन, टिहरी रियासत एवं उसकी शासन व्यवस्था, स्वतंत्रता आन्दोलन में उत्तराखण्ड।
उत्तराखण्ड की संस्कृति : जातियां एवं जनजातियां, धर्म एवं लोक विश्वास, परन्पराएं एवं रीति-रिवाज, वेश-भूषा एवं आमूषण, मेले एवं त्यौहार, नृत्य, गायन एवं वादय यंत्र, खेलकूद, प्रतियोगिताएं एवं पुरस्कार पर आधारित होंगे।
उत्तराखण्ड का भूगोल एवं जनाकिकी: भौगोलिक स्थिति। उत्तराखण्ड में नदियां, पर्वत, जलवायु, वन संसाधन, मिट॒टी एवं बागवानी, प्रमुख फसलें, सिंचाई के साधन, प्राकृतिक एंव मानव जनित आपदायें एवं आपदा प्रबन्धन, जल संकट और जलागम प्रबन्धन, पर्यावरण एवं पर्यावरणीय आन्दोलन, उत्तराखण्ड की जनसंख्या: वितरण, घनत्व, लिंगानुपात, साक्षरता एवं जनसंख्या पलायन।
उत्तराखण्ड के आर्थिक एवं प्राकृतिक संसाधन- प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था एवं प्रमुख शिक्षण संस्थान, पर्यटन, खनिज तथा उद्योग, संसाधनों के उपयोग की वर्तमान स्थिति। उत्तराखण्ड में गरीबी व बेरोजगारी, उन्मूलन व आर्थिक विकास की दिशा में चलाई जा रही विभिन्नं योजनाएँ।
सामान्य बुद्धि परीक्षण : सामान्य बुद्धि परीक्षण के अन्तर्गत बोधगम्यता, तार्किक एवं गणितीय क्षमता इत्यादि का परीक्षण सम्मिलित है।
General Hindi (20 प्रश्न / 40 अंक)
स्वर एवं व्यंजन, स्वर और व्यंजन वर्णों का वर्गीकरण, संज्ञा, सर्वनाम-व्याकरण विचार, तत्सम, तदभव, प्रत्यय, उपसर्ग, समास, संधि पर्यायवाची, विलोम शब्द, वाक्यांश के लिए एक शब्द, मुहावरे एवं लोकोक्ति, विराम चिहन।
Paper II (Veterinary Science)
कुल प्रश्न: 150, अधिकतम अंक: 300 एवं समयावधि: 3 घंटे।
1. पशु चिकित्सा फार्माकोलॉजी और विष विज्ञान : सामान्य फार्माकोलॉजी एवं ऐतिहासिक विकास। औषधियों की स्रोत और प्रकृति, फार्माकोलॉजी टर्म एवं औषधियों का नामकरण। फार्माकोकाइनेटिक्स और फार्माकोडायनामिक्स। प्रतिकूल दवा प्रतिक्रियाएं, दवा पारस्परिक क्रिया। विभिन्नन प्रकार की दवाएं और उनके स्वायत्त तंत्रिका तंत्र, केंद्रीय तंत्रिका तंत्र, पाचन तंत्र, हृदय प्रणाली, श्वसन प्रणाली और मूत्रजननांगी प्रणाली जैसे विभिन्न शरीर प्रणालियों पर प्रभाव।
पशु चिकित्सा कीमोथेरेपी और जानवरों में दुरुपयोग की दवाएं। स्वदेशी औषधीये पौधों की फार्माकोलॉजी। विषैले पौधों और धातुओं और गैर धातुओं की विषाक्तता, कृषि रसायन, जीवाणु और फफूंदी जन्य टॉक्सिंस, विषैले जन्तुओं द्वारा काटना और डंक मारना, परिरक्षक दवाएं और जैवनाशक अवशेष पर्यावरण प्रदूषक और विकिरण के खतरे।
2. पशु चिकित्सा सूक्ष्म जीव विज्ञान : पशु चिकित्सा सूक्ष्म जीव विज्ञान, जीवाणु रंग और रंग तकनीक का इतिहास और दायरा। जीवाणु की सूक्ष्मदर्शीय आकारीय संरचना। एरोबिक तथा एनारोबिक जीवाणुओं का पृथकीकरण एवं पहचान। सूक्ष्मजीव प्रतिरोधी परीक्षण। संक्रमण के प्रकार, सोत और संचरण की विधि। रोगजनकता और उग्रता के निर्धारक। जीवाणुओं की आनुवंशिकी, प्लाज्मिड़ और दवा प्रतिरोध।
ग्राम नकारात्मक, ग्राम पॉजिटिव बैक्टीरिया और कवक का विलगन, वृद्धि, कल्चर रूपात्मक, जैव रासायनिक और एंटीजेनिक विशेषताएं, साथ ही साथ उनके द्वारा रोगव्यापकता और रोगजनकता, रोगउग्रता निदान। माइकोटॉक्सिकोसिस का पशु चिकित्सीय महत्व। पीसीआर, डीएनए अनुक॒मण और डीएनए फिंगर प्रिंटिंग, जैव सूचना विज्ञान, आईपीआर और सोख्ता तकनीक। इस्यूनोलॉजी के सिद्धांत, लसिका अंग प्रतिरक्षा प्रणाली से जुड़े अंग, ऊतक और कोशिकीय एंटीजन, एंटीबॉडी, एंटीजन प्रसंस्करण और एंटीबॉडी उत्पादन।
मेजर हिस्टोकम्पैटिबिलिटी कॉम्प्लेक्स (MHC), इम्यूनोटॉलेरेंस, कामप्लीमेंट प्रणाली, अतिसंवेदनशीलता, साइटोकिन्स। टीकों के लिए प्रतिरक्षा की अवधारणा, सीरोलॉजिकल परीक्षण। वायरस की संरचना और वर्गीकरण, वायरस प्रतिकृति, वायरस-सेल इंटरैक्शन, वायरस का कल्चर। सामान्य विशेषता, एंटीजन, महत्वपूर्ण डीएनए और आरएनए वायरस के कल्चर साथ ही साथ उनकी रोगजनकता, रोगव्यापकता, नैदानिक संकेत, निदान, रोग बचाव एवं नियंत्रण और उनके और प्राइन प्रोटीन द्वारा पशुओं और कुक्कुटों में उत्पन्न रोग।
3. पशु चिकित्सा परजीवी विज्ञान : सामान्य परजीवी विज्ञान, परजीवी के प्रकार, होस्ट और वैक्टर। परजीवियों के संचरण के तरीके, परजीवी-होस्ट इंटरैक्शन, परजीवी संक्रमण एवं संक्रमण के खिलाफ प्रतिरक्षा। ट्रेमाटोड, नेमाटोड, सिस्टोड्स और प्रोटोजोआ के साथ-साथ पशु चिकित्सा महत्व के आर्थेपोड्स का जीवन चक्र सहित परजीवियों की पहचान, रूपात्मक विशेषताएं, उनके विकासात्मक चरण, जीवन चक्र, संचरण के तरीके, रोगजनन, रोगव्यापकता, निदान और सामान्य रोग स्थितियों के नियंत्रण के उपाय। प्रोटोजोआ परजीवी सहित ट्रिपेनोसोमा प्रजाति, बेबेसिया प्रजाति, थेलेरिया प्रजाति, कोक्सिडिया प्रजाति, ट्राइकोमोनास प्रजाति, हिस्टोमोनास प्रजाति, परजीवियों का संग्रह, स्थिरीकरण, परिरक्षण और आरोपण।
4. पशु चिकित्सा विकृति विज्ञान : रोग के प्रमुख आंतरिक और बाहा कारण, हेमोडायनामिक विकार, प्रतिवर्ती और अपरिवर्तनीय सेल चोट, सेल की चपापचय पैथोलॉजी और परिगलन। पोस्टमॉर्टम परिवर्तन, सूजन, इम्यूनोपैथोलॉजी। पाचन, श्वसन, मस्कुलोस्केलेटल, कार्डियोवैस्कुलर, हेमेटोपोएटिक, लिम्फोइडड, मूत्र, प्रजनन, तंत्रिका, अंतःस्रावी तंत्र, त्वचा और उपांग, कान और आंख को प्रभावित करने वाले पैथोलॉजिकल परिवर्तन।
एनिमल ऑन्कोलॉजी, वेटरनरी व्लिनिकल पैथोलॉजी, नेक्रोपसी, मूत्र परीक्षण। वायरल, बैक्टीरियल, फंगल, माइकोप्लाज्जल और परजीवी रोगों की विकृति। पोषण और चपापचय संबंधी विकार, विष विज्ञान, एवियन पैथोलॉजी। प्रयोगशाला और जंगली जानवरों की पैथोलॉजी। विभिन्नप रोगों के सकल और सूक्ष्म रोग संबंधी घाव। ऊतक वर्गों में कारक एजेंटों का प्रदर्शन। कुक्कट का पोस्टमार्टम परीक्षण, पोस्टमार्टम रिपोर्ट लिखना। निदान के लिए नैदानिक और रुग्ण नमूनों का संग्रह, संरक्षण और प्रेषण। रैट, माइस और गिनी पिग के महत्वपूर्ण रोगों की विकृति।
5. पशु चिकित्सा जन स्वास्थ्य और महामारी विज्ञान : जन स्वास्थ्य में पशु चिकित्सक की भूमिका, एकल स्वास्थ्य अवधारणा। दुग्ध और दुग्ध उत्पादों, मांस और मांस उत्पादों का स्वच्छ उत्पादन। दूध और मांस में मिलावट और दूषित पदार्थों की रोकथाम और नियंत्रण। खाद्य जनित संक्रमण और विषाक्तता, जीवनाशकों के जहरीले अवशेष, खाद्य सामग्री में हार्मोन, भारी धातु, एंटीबायोटिक्स। जोखिम विश्लेषण, विश्व व्यापार संगठन समझौते, सैनेटरी और फाइटोसैनेटरी उपाय।
पशुधन रोगों की रोगव्यापकता, संक्रमण का संचरण और बरकरार रखना, पशु रोगों की निगरानी, पशु रोग पूर्वानुमान। पशु और पशु उत्पादों के अंतर्राष्ट्रीय व्यापार में विश्व पशु स्वास्थ्य संगठन (ओ आई ई) की भूमिका और कानून, जूनोटिक रोगों की रोकथाम और नियंत्रण, जूनोसिस रोगों की रोकथाम और नियंत्रण के लिए बहुविभागीय दृष्टिकोण। उभरता हुआ, फिर से उभरता हुआ और व्यावसायिक जूनोसिस। जूनोसिस के संचरण में घरेलू, जंगली, पालतू और प्रयोगशाला जानवरों और पक्षियों की भूमिका।
बायोटेरोरिज्म के एजेंट के रूप में जूनोटिक रोगजनकों की भूमिका। जुनोटिक बीमारियों की रोगव्यापकता, नैदानिक लक्षण एवं प्रबंधन। पर्यावरणीय स्वच्छता, पारिस्थितिकी तंत्र, जैव विविधता, वायु और जल जनित संक्रमण एवं विषाक्ताताएं, ध्वनि प्रदूषण, परमाणु खतरे, ग्लोबल वार्मिंग और ग्रीन हाउस का पशुधन पर प्रभाव। जलवायु परिवर्तन और अंतर्राष्ट्रीय संधियों या प्रोटोकॉल का प्रभाव।
6. पशु चिकित्सा शल्य चिकित्सा और रेडियोलॉजी : प्रीऑपरेटिव, इंट्राऑपरेटिव और पोस्ट ऑपरेटिव विचार, सूक्ष्मजीव निर्जीवीकरण और कीटाणुशोधन, टांके, सर्जिकल उपचार-तीव्र और पुरानी सूजन, ट्यूमर, सिस्ट, हर्निया और हेमेटोमा, घाव प्रबंधन, सर्जिकल शॉक का प्रबंधन, स्थानीय और सामान्य संज्ञाहरण, शामक और ट्रैंक्विलाइजर, साँस लेना संज्ञाहरण, विघटनकारी संज्ञाहरण। एवियन, वाइल्ड, जू, एक्सोटिक और लैब एनिमल एनेस्थीसिया और कैप्चर मायोपैथी, एनेस्थेटिक इमरजेंसी और प्रबंधन।
एक्स-रे के भौतिक गुण, कंट्रास्ट रेडियोग्राफी, डायगोस्टिक अल्ट्रासोनोग्राफी, विकिरण के खतरे और सुरक्षा उपाय। सिर, गर्दन, वक्ष और पेट के रोगों का शल्य चिकित्सा द्वारा प्रबंधन। घोड़े, कुत्ते और गोवंशीय पशुओं में लंगड़ापन का प्रबंधन, फ्रैक्चर, स्पाइनल ट्रॉमा, पुनर्वास और आर्थोपेडिक रोगियों की फिजियोथेरेपी, रूमेनोटॉमी, सिस्टोटॉमी, सीजेरियन ऑपरेशन, ओवेरियोहिस्टेरेक्टॉमी, स्ट्रिंगहाल्ट और ओवरीएक्टोमी।
7. पशु चिकित्सा औषधि विज्ञान : पशु चिकित्सा औषधि विज्ञान का इतिहास, पशु रोगों की अवधारणा, चिकित्सा की विभिन्नट प्रणाली, नैदानिक परीक्षण,/सामान्य परीक्षण और प्रणालीगत परीक्षण के विभिन्नध पहलू। रोगों का अनुमान, निदान की अवधघारणाओं के पैटर्न, विभेदक और निदान निगरानी, झुंड और स्वास्थ्य और निदान की संगरोध अवधारणाएं, विभेदक निदान, उपचार और सामान्य प्रणालीगत अवस्थाओं का पूर्वानुमान, बुखार, सेप्टीसीमिया, टॉक्सिमिया, सदमा, निर्जलीकरण, दर्द, तनाव जैसे विकार और तनाव, एलर्जी और एनाफाअलेक्सिस।
पशुओं और कुक्कुट में पाचन तंत्र, श्वसन तंत्र, हृदय प्रणाली, मूत्र, तंत्रीका, मस्कुलोस्कैलटन, हीमोपोडटिक, लसिका तंत्र, त्वचा और संवेदी अंग का निदान, विभेदक निदान, उपचार, रोकथाम और नियंत्रण। बैक्टीरिया, वायरल, माइकोप्लास्मल, रिकेट्सियल, फंगल और परजीवी एजेंटों के कारण होने वाले विभिन्नर पशुओं और कुक्कुट संक्रामक रोगों का निदान, विभेदक निदान, उपचार, रोकथाम और नियंत्रण। आपातकालीन और महत्वपूर्ण देखभाल दवा।
चपापचयी, पोषण की कमी से होने वाले रोग, विषाक्तता और विषाक्त विकारों का प्रबंधन। चिड़ियाघर और जंगली जानवरों की बीमारियों की रोकथाम, उपचार और नियंत्रण। पशु चिकित्सकों के टीकाकरण और कानूनी कर्तव्य। पशु रोगों की रोकथाम और नियंत्रण अधिनियम और कानून, पशुधन आयात अधिनियम, बीमा और देयता। पशु कल्याण संगठन और उनकी भूमिका, मानव और पशु कल्याण संघर्ष और पशु चिकित्सक की पशु कल्याण शिक्षकों के रूप में भूमिका।
8. पशु चिकित्सा प्रसूति रोग और प्रसूति प्रजनन विभाग : नर और मादा प्रजनन प्रणाली की नैदानिक शारीरिक संरचना, लंबे समय तक यौवन, ईस्ट्रस, निषेचन, गर्भाधान की विफलता, प्रजनन क्षमता में सुधार, बॉझपन का प्रबंधन, बॉझपन, गर्भावस्थाम के अनुप्रयुक्त एंडोक्रिनोलॉजी, झुंड प्रजनन स्वास्थ्य प्रबंधन। ईस्ट्रस डिटेक्शन एड्स, ईस्ट्रस सिंक्रोनाइजेशन, ओव्यूलेशन, प्रेग्नेंसी डायग्नोसिस, पार्चूरेशन, प्रोलैप्स, डिस्टोकिया, फीटोटॉमी, पोस्टपार्टम यूटेरिन डिसऑर्डर, क्लिनिकल रिप्रोडक्टिव एनाटॉमी।
पशुधन और पालतू पशुओं में कृत्रिम गर्भाधान तकनीक, नर प्रजनन की एंडोक्रिनोलॉजी, यौन व्यवहार, वीर्य स्खलन, वीर्य एक्सटेंड्र और डायलूटर, संरक्षण और पोस्ट थॉ मूल्यांकन तकनीक। नर बाँझपन के रूप और सांडों की प्रजनन क्षमता का मूल्यांकन। मादा प्रजनन पथ की अल्ट्रासोनोग्राफी, मादा, नर और पालतू पशुओं के प्रजनन अंगों पर सर्जिकल प्रक्रियाएं। तरल नाइट्रोजन कंटेनरों का रखरखाव, एकाघिक ओव्यूलेशन और भ्रूण स्थानांतरण तकनीकें।
9. पशु चिकित्सा क्लिनिक : पशु चिकित्सालयों के कार्यबल का प्रशासन और प्रबंधन। बीमार पशुओं की प्रारंभिक नैदानिक जांच। नैदानिक मामलों के प्रयोगशाला नमूनों का संग्रह, संरक्षण, लेबलिंग, पैकेजिंग और भंडारण। डॉक्टर-क्लाइंट इंटरेक्शन। प्रयोगशाला निदान के लिए रक्त, मल, श्लेष द्रव, दूध जैसे नैदानिक नमूनों का विश्लेषण। हिस्टोपैथोलॉजी के लिए बायोप्सी और ऊतक/अंग, जानवरों की नैदानिक स्थितियों के साथ प्रयोगशाला निष्कर्षों की व्याख्या।
Paper III (Animal Science)
कुल प्रश्न : 150, अधिकतम अंक : 300 एवं समयावधि : 3 घंटे।
1. वेटरनरी एनाटॉमी : ओस्टियोलॉजी, आथ्रोलॉजी, मायोलॉजी, स्प्लेवकोलोजी, एंजियोलॉजी और तंत्रिका विज्ञान तथा शरीर के विभिन्नर अंगों (पैर, सिर और गर्दन, वक्ष, पेट और श्रोणि) का गोवंशीय पशु और भैंस, भेड़, बकरी, ऊंट, घोड़े, कुत्ते, सुअर और मुर्गे में अंतर। पाचन का ऊतक विज्ञान, संचार, मूत्र, श्वसन, तंत्रिका, लसीका, अंतःस्रावी, नर और मादा जननांग प्रणाली और पालतू पशुओं की स्तन ग्रंथियां। ऊतकीय तकनीक, संवेदी अंगों यानी आंख, कान एवं त्वचा की रचना और सूक्ष्म संरचना। पालतू पशुओं का भ्रूणविज्ञान।
2. वेटरनरी फिजियोलॉजी : कार्डियोवास्कुलर सिस्टम की फिजियोलॉजी, हेमेटोलॉजी। मांसपेशियों, पाचन, श्वसन, उत्सर्जन और तंत्रिका तंत्र की फिजियोलॉजी। वृद्धि और वृद्धि कर्व की फिजियोलॉजी। एंडोक्रिनोलॉजी और विभिन्नज एंडोक्रिन ग्लैंड्स का ज्ञान । मादा प्रजनन की फिजियोलॉजी, एस्ट्रस चक्र, दुग्ध निकालना। नर प्रजनन और वीर्य मूल्यांकन की फिजियोलॉजी। बृद्धि और पर्यावरण फिजियोलॉजी और जानवरों पर इसका प्रभाव।
3. पशु चिकित्सा जैव रसायन : पशु चिकित्सा जैव रसायन का दायरा और महत्व। जैव रसायन और कार्बोहाइड्रेट का जैविक महत्व (मोनोसेकेराइड, डाईसेकेराइड, पॉलीसेकेराइड, म्यूकोपॉलीसेकेराइड), प्रोटीन, लिपिड और न्यूक्लिक अम्ल। मध्यवर्ती चपापचय और कार्बोहाइड्रेट, प्रोटीन, लिपिड और न्यूक्लिक एसिड के चपापचय रास्ते। कार्बोहाइड्रेट चपापचय के विकार। सीरम जैव रसायन का पता लगाना, जिसमें एंजाइम, हार्मोन, खनिज और विटामिन शामिल हैं तीव्र चरण प्रोटीन, लीवर फंक्शन टेस्ट, किडनी फंक्शन टेस्ट, द्रव चिकित्सा के लिए जैव रासायनिक आधार, जेनोबायोटिक्स का चपापचय।
4. पशु चिकित्सा और पशुपालन विस्तार शिक्षा : पशु चिकित्सा और पशु विज्ञान में विस्तार शिक्षा की बुनियादी अवधारणाएं एवं दर्शन तथा भारत में इसका विकास और अनुप्रयोग। पशुघन आधारित आजीविका और उनके विकास के साथ-साथ समकालीन समाज में पशुओं की भूमिका। पशुपालन विस्तार में ग्रामीण समाजशास्त्र की भूमिका। पशुधन विकास के लिए प्रौद्योगिकी का हस्तांतरण। संचार और विस्तार शिक्षण विधियाँ। पशुधन क्षेत्र में सूचना और संचार प्रौद्योगिकी (आईसीटी) के अनुप्रयोग की ताकत और सीमाएं। पशुधन अर्थशास्त्र, विषणन और उद्यमिता। पशुधन उद्यमों में समसामयिक मुद्दे।
5. पशु आनुवंशिकी और प्रजनन : पशु आनुवंशिकी और प्रजनन में सांख्यिकी, जैवसांख्यिकी और कम्प्यूटर उपकरण का महत्व और अनुप्रयोग सहित पशु आनुवंशिकी के सिद्धांत, साइटोजेनेटिक्स, आनुवंशिक विरासत की अभिव्यक्ति, आणविक आनुवंशिकी, जीन की अवधारणा और इसकी संरचना और आणविक तकनीक। जनसंख्या आनुवंशिकी के सिद्धांत। पशुधन और कुक्कूट प्रजनन, नस्लों का वर्गीकरण। पशुधन एवं कुक्कुट के आर्थिक चरित्र और उनका महत्व।
चयन, प्रजनन के प्रकार और तरीके, पशुओं के सुधार के लिए रणनीतियां, नई नस्लों/उपभेदों का विकास। देश एवं राज्य में वर्तमान पशुधन एवं कुक्कुट पालन की नीतियाँ एवं कार्यक्रम। पशु आनुवंशिक संसाधनों का संरक्षण। पशुधन और कुक्कुट के अनुवांशिक सुधार के लिए जैव प्रौद्योगिकी तकनीक का अनुप्रयोग। रोग प्रतिरोधक क्षमता के लिए पशु प्रजनन। पालतू जानवरों, चिड़ियाघर और जंगली जानवरों का प्रजनन।
6. पशुधन उत्पादन प्रबंधन : पशुघन का जनसांख्यिकीय वितरण, भारत में पशुधन उद्योग की समस्याएं और संभावनाएं। सामान्य पशुपालन तकनीकी शब्दावली। पशुधन और जंगली जानवरों का परिवहन एवं पशु प्रक्षेत्र प्रबंधन अभ्यास। पशुओं के सामान्य दूषित आचरण और उनकी रोकथाम। जैविक पशुधन उत्पादन। पशुधन का मूल्यांकन, चयन और छंटाई।
छोटे और बड़े रोमंथी पशु, कुक्कुट, खरगोश/पालतू पशु/अश्व प्रजाति के पशु/शूकर और चिड़ियाघर के पशुओं के आवास, नस्लेंप, आहार व्यवस्था शामिल हैं का रिकॉर्ड रखना एवं अन्य आवश्यक प्क्षेत्र कार्य उत्पादन एवं प्रबंधन, हैचरी प्रबंधन। विभिन्नं पालतू, सहचर एवं चिड़ियाघर के जानवरों का नियमित रूप से और प्राकृतिक आपदाओं के दौरान पशु कल्याण। पशु चिकित्सकों के कानूनी कर्तव्य। जानवरों के खिलाफ सामान्य अपराध और इन अपराधों से संबंधित कानून। चारा उत्पादन और संरक्षण। बेसहारा एवं चोटिल पशुओं का प्रबंधन।
7. पशु पोषण : कार्बोहाइड्रेट, प्रोटोन और वसा का पोषण संबंधी पहलू। पशुघन और कुक्कुट उत्पादन के लिए सामान्य आहार और चारे, उनके अवयव, वर्गीकरण, उपलब्धता और महत्व। विभिन्न। प्रजातियों की पोषण संबंधी आवश्यकताएं-प्रोटीन, कार्बोहाइड्रेट, खनिज और विटामिन। पशुओं की विभिन्न। प्रजातियों के लिए आहार प्रौद्योगिकी, योजक, मिलावट, आहार मानक, संतुलित आहार का निर्माण। बछड़े, शुष्क, गर्भवती और दुधारू पशु, ओसर, सांड़, भारवाही पशु, अंड़े एवं मांस देने वाली मुर्गियों के पोषण की आवश्यकताएं एवं आहार निर्माण।
आहार संबंधी प्रयोग। पाचन और चपापचय परीक्षण। रोमंथी पशुओं में पाचनशक्ति का मापन और उसे प्रभावित करने वाले कारक, भेड़ एवं बकरी की वृद्धि एवं उत्पादन (दूध, मांस और ऊन) के विभिन्ना चरणों के लिए आहार निर्माण एवं खिलावट। उच्च उत्पादक पशुओं की दाना व्यवस्था एवं बायपास पोषक तत्वों की भूमिका। चपापचय संबंधी विकार और पोषण हस्तक्षेप | रोमंथी पशुओं के लिए एनपीएन यौगिकों का उपयोग। कुक्कट, शूकर और अश्व प्रजाति में पोषक तत्वों की आवश्यकताएं और आहार निर्माण।
8. पशुधन उत्पाद प्रौद्योगिकी : भारत में दुग्ध उद्योग की संभावनाएं। दुग्ध संग्रह और प्रसंस्करण, गुणवत्ता परीक्षण, दुग्ध के अवयव, जीएलपी प्रथाएं और एचएसीसीपी, डेयरी संयंत्र प्रबंधन। घी, पनीर, दही, खोया आदि जैसे दुग्ध उत्पादों को तैयार करना और गुणवत्ता प्रबंधन। A1 और A2 दूध का महत्व। बीआईएस, एफएसएसएआई विनिर्देश का ज्ञान, दूध और दूध उत्पादों के लिए खाद्य सुरक्षा मानक। ग्रामीण, शहरी और आधुनिक बूचड़खानों का विन्यास एवं प्रबंधन। एफएसएसएआई मानकों पर बूचड़खानों का विन्यास और संगठन। पशु कल्याण और पूर्व-वध देखभाल।
जानवरों और मांस का वध-पूर्व एवं वधोपरांत परीक्षण, मांस की पोषक गुणवत्ता, दूध और मांस उत्पादों के लिए प्रसंस्करण प्रौद्योगिकी, मांस का संरक्षण और मांस उत्पादों और गुणवत्ता के रखरखाव। बूचड़खाने के उपोत्पाद एवं बहिस्राव प्रबंधन। मांस और मांस के उत्पादों को नियंत्रित करने वाले राष्ट्रीय या अंतर्राष्ट्रीय व्यापार कानून। जैविक और आनुवंशिक रूप से संशोधित मांस और पोल्ट्री उत्पाद। ऊन के गुण, संरचना और इसका वर्गीकरण। कटाई उपरान्त ऊन के गुणवत्ता एवं वर्गीकरण कार्य। फर, पेल्ट और विशेष फाइबर के प्रसंस्करण उद्योग के संबंध में बुनियादी ज्ञान।
See also: Uttarakhand Samuh G Syllabus Group C Exam
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